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यूरोपीय संघ की नई आर्कटिक रणनीति में सुरक्षा सबसे ऊपर, ग्रीनलैंड केबल और ज़्यादा आइसब्रेकर

सुदूर उत्तर के लिए यूरोपीय आयोग की संशोधित रणनीति रूसी ड्रोन और केबल तोड़फोड़ के साथ-साथ ग्रीनलैंड पर डोनाल्ड ट्रंप की नज़र का जवाब समुद्री निगरानी केंद्र और अपने उपग्रह नेटवर्क से देती है।

संपादकीय डेस्क से · ब्रसेल्सप्रकाशित
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन और ग्रीनलैंड का तट (फ़ाइल फ़ोटो)
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन और ग्रीनलैंड का तट (फ़ाइल फ़ोटो)Photos: Etienne Ansotte / Wikimedia Commons; Gordon Leggett / Wikimedia Commons, CC BY 4.0, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  1. ईयू की आर्कटिक रणनीति में सुरक्षा और लचीलापन अब चार प्राथमिकताओं में पहले नंबर पर है।
  2. योजना में ग्रीनलैंड को सीधे यूरोप से जोड़ने वाली फाइबर-ऑप्टिक केबल और ज़्यादा यूरोपीय आइसब्रेकर शामिल हैं।
  3. उर्सुला फॉन डेर लेयेन ने कहा कि आर्कटिक में 'भू-राजनीति की टेक्टोनिक प्लेटें टकरा रही हैं'।

यूरोपीय संघ (ईयू) ने आर्कटिक के लिए अपनी योजना नए सिरे से लिखी है और इसमें सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा है। इसमें समुद्री निगरानी केंद्र, ज़्यादा आइसब्रेकर जहाज़ और ग्रीनलैंड से यूरोप तक फाइबर-ऑप्टिक केबल की बात है। यह ऐसे समय हुआ है जब सुदूर उत्तर में रूस की सैन्य पहुंच बढ़ रही है और वॉशिंगटन की नज़र ग्रीनलैंड पर टिकी है।

यूरोपीय आयोग ने मंगलवार को संशोधित रणनीति पेश की। इसमें सुरक्षा और लचीलेपन को चार प्राथमिकताओं में पहले स्थान पर रखा गया है। बाकी तीन हैं जलवायु परिवर्तन, आर्थिक समृद्धि और इलाके में रहने वाले लोगों के लिए अवसर।

आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन ने कहा, “आर्कटिक वह जगह है जहां भू-राजनीति की टेक्टोनिक प्लेटें टकरा रही हैं।” उन्होंने जोड़ा कि वहां संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को अब हल्के में नहीं लिया जा सकता।

योजना में क्या है

इसके केंद्र में एक नया समुद्री सुरक्षा केंद्र है, जहां सदस्य देश और साझेदार जानकारी साझा कर सकेंगे और आर्कटिक के पानी में जहाज़ों की आवाजाही पर नज़र रख सकेंगे। आगे चलकर इससे रूस के तथाकथित शैडो फ्लीट के जहाज़ों पर नज़र रखने, अवैध मछली पकड़ने और प्रदूषण का पता लगाने और खोज-बचाव में तालमेल का काम भी होगा।

ईयू यूरोप की आइसब्रेकर क्षमता बढ़ाने पर भी काम करेगा। वह एक पैन-आर्कटिक फाइबर-ऑप्टिक केबल का समर्थन करेगा जो ग्रीनलैंड को सीधे यूरोप से जोड़ेगी, और जो कनाडा, जापान और दक्षिण कोरिया तक पहुंचने वाले बड़े नेटवर्क का हिस्सा होगी। इलाके में सरकारी संचार IRIS² पर चलेगा, जो ईयू का प्रस्तावित सुरक्षित उपग्रह समूह है और जिसे स्टारलिंक का यूरोपीय जवाब माना जाता है।

इनमें से कई कदम, खासकर केबल और उपग्रह, यूरोप की अमेरिका पर निर्भरता घटाने के मकसद से उठाए गए लगते हैं।

जलवायु के मोर्चे पर रणनीति आर्कटिक के समुदायों के साथ मिलकर ज़्यादा शोध, अवलोकन और निगरानी का वादा करती है। आयोग ने यह रुख भी दोहराया कि तेल, कोयला और गैस ज़मीन में ही रहने चाहिए, आर्कटिक में भी।

रूस, और वॉशिंगटन

ईयू की विदेश नीति प्रमुख काया कालास ने सुदूर उत्तर में रूस की बढ़ती सैन्य मौजूदगी की ओर ध्यान दिलाया और ड्रोन घुसपैठ, जीपीएस जैमिंग और समुद्र के नीचे केबलों से तोड़फोड़ का ज़िक्र किया।

जर्मनी, फ्रांस, फिनलैंड और डेनमार्क समेत 12 देशों के नेताओं ने पिछले महीने आर्कटिक पर बैठक की थी और रूस को सबसे बड़ा खतरा बताया था, साथ ही चीन और अमेरिका की महत्वाकांक्षाओं का भी ज़िक्र किया था। जर्मन चांसलर फ्रीडरिख मर्त्ज़ ने तब कहा था कि “हाई नॉर्थ, लो अटेंशन” यानी सुदूर उत्तर की अनदेखी का दौर खत्म हो गया है। फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो ने रूस को लंबे समय का सबसे बड़ा खतरा बताया और कहा कि ईयू आर्कटिक को रणनीतिक सीमा की तरह देखे।

अमेरिका वाली बात ब्रसेल्स में खुलकर कहना मुश्किल है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की मांग बार-बार कर चुके हैं। इस साल उनके तेवर नरम पड़े हैं और ग्रीनलैंड व डेनमार्क के साथ एक सुरक्षा समझौता भी हुआ है, पर यूरोप में कई लोग अब भी सशंकित हैं, खासकर तब से जब ट्रंप ने द्वीप पर तेल, गैस और खनिज खोज की घोषणा की, जिसका डेनमार्क ने विरोध किया।